MPPSC अध्यक्ष सूची 2026: वर्तमान अध्यक्ष, कार्य व शक्तियां [Updated]

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) एक संवैधानिक निकाय है, जिसका गठन संविधान के अनुच्छेद 315 तथा राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 118(3) के तहत 1 नवंबर 1956 को किया गया था। इसका मुख्य कार्य राज्य प्रशासनिक सेवाओं के लिए निष्पक्ष भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करना है।

प्रमुख विवरणमहत्वपूर्ण तथ्य
स्थापना तिथि1 नवंबर 1956 (अधिसूचना: 27 अक्टूबर 1956)
मुख्यालयइंदौर, मध्य प्रदेश
संवैधानिक प्रावधानभाग 14, अनुच्छेद 315 से 323
प्रथम अध्यक्षडी. बी. रेगे (D. B. Rege)
वर्तमान अध्यक्षश्री राजेश लाल मेहरा
नियुक्ति कर्ताराज्यपाल (Governor)
कार्यकाल6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)
वार्षिक प्रतिवेदनराज्यपाल को सौंपा जाता है (अनुच्छेद 323)

Table of Contents

MPPSC के सभी अध्यक्षों की सूची (First to Present)(1956 से वर्तमान)

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की स्थापना 1 नवंबर 1956 को हुई थी। आयोग के प्रथम अध्यक्ष से लेकर वर्तमान अध्यक्ष तक का संपूर्ण आधिकारिक विवरण नीचे तालिका में दिया गया है:

क्र.अध्यक्ष का नामकार्यकाल
1श्री डी. बी. रेगेप्रथम अध्यक्ष
2श्री एस. सी. सेठ1957 – 1960
3श्री एस. पी. मुशरान1960 – 1963
4श्री आर. राधाकृष्णन1963 – 1969
5श्री एम. पी. श्रीवास्तव1969 – 1972
6श्री के. सी. तिवारी1972 – 1974
7श्री के. एन. सिन्हा1974 – 1978
8श्री एन. सुंदरम1978 – 1984
9श्री एम. बी. पीटर1984 – 1986
10श्री एस. आई. शर्मा1986 – 1991
11श्री जे. एन. कौल1992 – 1996
12श्री ओ. पी. मेहरा1996 – 1999
13श्री विनय शंकर दुबे2000 – 2006
14श्री प्रदीप कुमार जोशी2006 – 2011
15श्री अशोक कुमार पांडे2012 – 2015
16श्री विपिन व्यवहारे2015 – 2017
17श्री भास्कर चौबे2018 – 2020
18श्री राजेश लाल मेहरा2021 से वर्तमान तक

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) – वर्तमान अध्यक्ष एवं सदस्य 2026

  • कार्यवाहक अध्यक्ष: डॉ. राजेश लाल मेहरा
  • सदस्य 1: नरेंद्र कुमार कोष्टी
  • सदस्य 2: डॉ पिंकेश लता रघुवंशी
  • सचिव : श्री मती रखी सहाय

पृष्ठभूमि एवं ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य

  • ब्रिटिश काल: भारत शासन अधिनियम 1935 के माध्यम से पहली बार प्रांतों में लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान किया गया था।
  • संवैधानिक आधार: 26 जनवरी 1950 को संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत राज्यों के लिए लोक सेवा आयोग का प्रावधान किया गया।
  • पूर्व स्थिति: मध्य प्रदेश के गठन से पहले ‘मध्य भारत आयोग’ कार्यरत था। भोपाल तथा विंध्य क्षेत्र के लिए कोई अलग आयोग नहीं था; इनकी परीक्षाएं UPSC आयोजित करता था।
  • आयोग की स्थापना: 1 नवंबर 1956 को संविधान के अनुच्छेद 315 तथा राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 की धारा 118(3) के अंतर्गत केंद्रीय गृह मंत्रालय की अनुशंसा पर राष्ट्रपति के आदेश द्वारा मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग का गठन हुआ (अधिसूचना: 27 अक्टूबर 1956)।

मध्य प्रदेश राज्य लोक सेवा आयोग की संरचना

1संविधान में राज्य लोक सेवा आयोग के सदस्यों की संख्या का उल्लेख नहीं है — यह राज्यपाल के विवेक पर छोड़ दिया गया है, जो आयोग की संरचना का निर्धारण करते हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग एक बहु-सदस्यीय निकाय है, जो एक अध्यक्ष व कुछ अन्य सदस्यों से मिलकर गठित होता है।

वर्तमान में आयोग में 1 कार्यवाहक अध्यक्ष के अतिरिक्त 2 अन्य सदस्य (कुल 3 सदस्य) पदस्थ हैं।

नोट: मध्य प्रदेश लोक सेवा सदस्य नियम 1973 के अनुसार सदस्यों की अधिकतम संख्या 7 हो सकती है।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की योग्यताएं (Qualification of chairman and member of the State Public Service Commission)

अध्यक्ष व सदस्यों की योग्यताओं का उल्लेख संविधान में नहीं किया गया है।

हालांकि यह आवश्यक है कि आयोग के आधे सदस्य वे हों, जिन्हें किसी संघ सरकार या राज्य सरकार के अधीन न्यूनतम 10 वर्ष कार्य करने का अनुभव हो।

अध्यक्ष एवं सदस्यों की सेवा शर्तें राज्यपाल द्वारा निर्धारित की जाती हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति (Appointment of chairman and member of state Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है।

नोट: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष एवं अन्य सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं।

आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के लिए शपथ का प्रावधान नहीं है।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य का कार्यकाल (Tenure of chairman and member of the State Public Service Commission)

संविधान के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा अन्य सदस्यों का कार्यकाल पद ग्रहण करने की तारीख से 6 वर्ष या अधिकतम 62 वर्ष की आयु (इनमें से जो पहले हो) तक होता है।

नोट: संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्य 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक (इनमें से जो भी पहले हो) अपने पद पर रह सकते हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का वेतन (Salary of chairman and member of the Union Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों के वेतन, भत्ते, पेंशन तथा अन्य खर्च राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं, अतः राज्य के विधानमंडल द्वारा इस पर मतदान नहीं होता।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्षों सदस्यों की सेवा शर्तें (service condition of chairman and member of the State Public Service Commission)

संविधान ने राज्यपाल को अध्यक्ष तथा सदस्यों की सेवा की शर्तें निर्धारित करने का अधिकार दिया है।

आयोग के सदस्यों की सेवा शर्तों में उनकी नियुक्ति के पश्चात कोई अलाभकारी परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का त्यागपत्र (resignation letter of chairman and member of the State Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य स्वेच्छा से किसी भी समय राज्यपाल को संबोधित कर अपना त्यागपत्र दे सकते हैं।

नोट: संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य अपना त्यागपत्र राष्ट्रपति को सौंप सकते हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों का निष्कासन (Process of removal of chairman and member of the State Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को कार्यकाल के पहले भी राष्ट्रपति द्वारा संविधान में वर्णित प्रक्रिया के माध्यम से हटाया जा सकता है। इन्हें निम्नलिखित परिस्थितियों में पद से निष्कासित किया जा सकता है:-

  • दिवालिया होने पर।
  • पदावधि के दौरान अन्यत्र वैतनिक कार्यों में संलग्न होने पर।
  • शारीरिक, मानसिक विकृत होने पर।

राष्ट्रपति इन मामलों में बिना उच्चतम न्यायालय की रिपोर्ट के आधार पर भी पद से हटा सकते हैं।

साबित कदाचार या दुर्व्यवहार के मामलों में राष्ट्रपति यह मामला जांच के लिए उच्चतम न्यायालय को संदर्भित करते हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट जांच के बाद पद से हटाने (बर्खास्तगी) की सिफारिश करता है, तो राष्ट्रपति के लिए यह सलाह मानना बाध्यकारी होता है। हालांकि, जांच की अवधि के दौरान संबंधित राज्य के राज्यपाल को आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को निलंबित करने का अधिकार होता है (अनुच्छेद 317(2))।

अर्थात राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष व सदस्यों को राष्ट्रपति उसी आधार पर पद से हटा सकते हैं, जिन आधारों पर संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों को हटाया जाता है।

नोट: राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति का अधिकार तो राज्य के राज्यपाल को है, किंतु किसी भी सदस्य को हटाने की शक्ति उसके पास नहीं है।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्यों की पुनः नियुक्ति (Re – appointment of chairman and member of State Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य को उसी पद पर पुनः नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य कार्यकाल के बाद भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन किसी और नियोजन (नौकरी) के पात्र नहीं होते हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष (कार्यकाल के बाद) किसी दूसरे राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य या संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बन सकता है।

राज्य लोक सेवा आयोग का सदस्य (कार्यकाल के बाद) उसी राज्य के लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या अन्य राज्य के लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष या संघ लोक सेवा आयोग का सदस्य या संघ लोक सेवा आयोग का अध्यक्ष बन सकता है।

नोट: राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य की राज्यपाल या अन्य किसी संवैधानिक पद पर नियुक्ति संभव है।

14. राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष (Acting chairman of State Public Service Commission)

राज्यपाल दो परिस्थितियों में राज्य लोक सेवा आयोग के किसी एक सदस्य को कार्यवाहक अध्यक्ष नियुक्त कर सकता है –

  1. जब अध्यक्ष का पद रिक्त हो।
  2. जब अध्यक्ष अनुपस्थित हो अथवा अन्य दूसरे कारणों से कार्य नहीं कर पा रहा हो।

कार्यवाहक अध्यक्ष तब तक कार्य करता है जब तक अध्यक्ष पुनः अपना काम नहीं संभाल लेता या अध्यक्ष फिर से नियुक्त ना हो जाए।

15. मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के कार्य (Function of the Madhya pradesh Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग राज्य सेवाओं के लिए वहीं काम करता है, जो संघ लोक सेवा आयोग केंद्रीय सेवाओं के लिए करता है।

यह राज्य की सेवाओं में नियुक्ति के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है।

राज्य लोकसेवा आयोग द्वितीय एवं तृतीय श्रेणी के अधिकारियों की भर्ती करवाता है।

राज्य में सिविल सेवकों की भर्ती का कार्य भी आयोग द्वारा संपादित किया जाता है।

राज्य विधानसभा द्वारा आयोग को लोक सेवाओं के संबंध में सौंपे गए कार्य करता है।

लोक सेवाओं में नियुक्ति, पदोन्नति, एक सेवा से दूसरी सेवा में स्थानांतरण के विषय में सलाह देता है।

राज्य के राज्यपाल द्वारा निर्देशित किसी विषय पर सलाह देने का कार्य करता है।

16. राज्य लोक सेवा आयोग का प्रतिवेदन रिपोर्ट (State Public Service Commission Report)

राज्य लोक सेवा आयोग प्रत्येक वर्ष अपने कार्यों की रिपोर्ट राज्यपाल को देता है।

राज्यपाल इस रिपोर्ट के साथ-साथ ऐसा ज्ञापन विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करता है, जिसमें आयोग द्वारा अस्वीकृत मामले और उनके कारणों का वर्णन किया जाता है।

17. राज्य लोक सेवा आयोग स्वायत्तता/स्वतंत्रता (Freedom of the State Public Service Commission)

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों को राष्ट्रपति संविधान में वर्णित आधारों पर ही हटा सकते हैं। इसलिए उन्हें पदावधि की सुरक्षा प्राप्त है।

हालांकि अध्यक्ष या सदस्य की सेवा की शर्तें राज्यपाल निर्धारित करते हैं, लेकिन नियुक्ति के बाद इनमें अलाभकारी परिवर्तन नहीं किये जा सकते हैं।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को वेतन, भत्ते व पेंशन सहित राज्य की संचित निधि से प्राप्त होते हैं। इन पर राज्य विधान मंडल में मतदान नहीं होता है।

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष एवं सदस्य कार्यकाल के पश्चात भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन नौकरी (नियोजन) के पात्र नहीं होते हैं।

18. राज्य लोक सेवा आयोग की सीमाएं (Limitations Of State Public Service Commission)

निम्नलिखित विषयों पर राज्य लोक सेवा आयोग से परामर्श नहीं किया जाता, यह कार्य आयोग के अधिकार क्षेत्र के बाहर है।

पिछड़ी जाति की नियुक्तियों पर आरक्षण देने के मामले में।

सेवाओं व पद पर नियुक्ति के लिए अनुसूचित जाति / जनजाति के दावों को ध्यान में रखते हुए।

राज्यपाल राज्य लोक सेवा आयोग के दायरे से किसी पद, सेवा व विषय को हटा सकता है।

संविधान के अनुसार राज्यपाल राज्य सेवा व पदों से संबंधित नियमन बना सकता है, इसके लिए राज्य लोक सेवा आयोग से संपर्क करने की जरूरत नहीं है, परन्तु इस तरह बनाये गये नियम को राज्यपाल को कम-से-कम 14 दिनों तक के लिए राज्य विधान मंडल के समक्ष रखना होगा। राज्य विधान मंडल चाहे तो उसे खारिज या संशोधित कर सकती है।

राज्य लोक सेवा आयोग के सुझाव सलाहकारी प्रकृति के होते हैं, अर्थात यह सुझाव सरकार के लिए बाध्यकारी नहीं होते हैं।

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग से जुड़ी प्रशिक्षण अकादमियां

1. लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासनिक अकादमी

  • देश का सर्वप्रमुख प्रशिक्षण संस्थान
  • स्थापना: 1959, मसूरी (उत्तराखंड)
  • वर्तमान में कार्मिक मंत्रालय के अधीन

2. सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी

  • 1948 में माउंट आबू (राजस्थान) में केंद्रीय पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज की स्थापना हुई
  • आंतरिक आपातकाल के दौरान इसे हैदराबाद स्थानांतरित किया गया
  • कोहली समिति की सिफारिश पर नाम बदलकर सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी रखा गया
  • गृह मंत्रालय के अधीन

3. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी

  • 1938 में देहरादून में इंडियन फॉरेस्ट कॉलेज की स्थापना
  • 1987 में नाम बदलकर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी किया गया
  • पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के अधीन

4. विदेश सेवा संस्थान

  • 1986 में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय अध्ययन स्कूल, नई दिल्ली के स्थान पर स्थापना

5. आर.सी.व्ही.पी. नरोन्हा प्रशासनिक अकादमी, भोपाल

  • मध्य प्रदेश का सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान
  • राज्य व केंद्र सरकार तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है

6. जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी, सागर

  • मध्य प्रदेश का सबसे प्राचीन प्रशिक्षण संस्थान
  • 1906 में पुलिस स्कूल के रूप में स्थापित
  • 1936 में पुलिस ट्रेनिंग कॉलेज के रूप में परिवर्तित
  • 1986 में नाम बदलकर जवाहरलाल नेहरू पुलिस अकादमी रखा गया

संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद (भाग XIV)

अनुच्छेदविषय-वस्तु
अनुच्छेद 315संघ तथा राज्यों के लिए लोक सेवा आयोगों का गठन
अनुच्छेद 316लोक सेवा आयोग के सदस्यों की नियुक्ति तथा कार्यकाल
अनुच्छेद 317लोक सेवा आयोग के सदस्यों की बर्खास्तगी एवं निलंबन
अनुच्छेद 318लोक सेवा आयोग के सदस्यों व कर्मचारियों की सेवा शर्तें संबंधी नियम बनाने की शक्ति
अनुच्छेद 319लोक सेवा आयोग के सदस्यों द्वारा सदस्यता समाप्ति के पश्चात पद पर बने रहने पर रोक
अनुच्छेद 320लोक सेवा आयोगों के कार्य
अनुच्छेद 321लोक सेवा आयोग के कार्यों को विस्तारित करने की शक्ति (संसद / राज्य विधानमंडल)
अनुच्छेद 322लोक सेवा आयोगों का खर्च (संचित निधि पर भारित)
अनुच्छेद 323लोक सेवा आयोगों के प्रतिवेदन (संघ लोक सेवा आयोग – राष्ट्रपति को, राज्य लोक सेवा आयोग – राज्यपाल को)

MPPSC अध्यक्ष FAQ – अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. MPPSC के वर्तमान अध्यक्ष कौन हैं?

वर्ष 2026 में उपलब्ध नवीन जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) के अध्यक्ष के रूप में डॉ. राजेश लाल मेहरा का उल्लेख मिलता है।

2. MPPSC के प्रथम अध्यक्ष कौन थे?

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के प्रथम अध्यक्ष डी. वी. रेगे (D. V. Rege) थे। MPPSC का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था।

3. MPPSC अध्यक्ष का कार्यकाल कितना होता है?

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, होता है। यह प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 में दिया गया है।

4. MPPSC के अध्यक्ष की नियुक्ति कौन करता है?

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति मध्य प्रदेश के राज्यपाल द्वारा की जाती है। यह प्रावधान संविधान के अनुच्छेद 316 में है।

5. MPPSC का गठन कब हुआ था?

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग का गठन 1 नवंबर 1956 को मध्य प्रदेश के गठन के साथ हुआ था।

6. MPPSC का मुख्यालय कहाँ है?

मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग का मुख्यालय इंदौर, मध्य प्रदेश में स्थित है।

7. MPPSC किस अनुच्छेद के अंतर्गत आता है?

MPPSC राज्य लोक सेवा आयोग होने के कारण भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 के अंतर्गत आता है।

8. MPPSC के अध्यक्ष को कौन हटा सकता है?

लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्य को हटाने की संवैधानिक शक्ति भारत के राष्ट्रपति के पास होती है। संविधान के अनुच्छेद 317 में इसके प्रावधान दिए गए हैं।

9. क्या MPPSC के अध्यक्ष का कार्यकाल 5 वर्ष होता है?

नहीं। राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु, जो भी पहले हो, तक होता है।

10. MPPSC के अध्यक्ष का इस्तीफा किसे दिया जाता है?

राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अपना इस्तीफा राज्यपाल को संबोधित करके देते हैं।

11. MPPSC के अध्यक्ष की नियुक्ति किस अनुच्छेद के तहत होती है?

MPPSC के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित प्रावधान भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 में दिए गए हैं।

12. MPPSC अध्यक्ष की सूची कहाँ से मिल सकती है?

MPPSC से संबंधित वर्तमान जानकारी के लिए मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट देखी जा सकती है। ऐतिहासिक अध्यक्षों की सूची प्रकाशित करते समय पुराने सरकारी अभिलेख, वार्षिक प्रतिवेदन और राजपत्र से भी मिलान करना उचित है।

13. MPPSC का पूरा नाम क्या है?

MPPSC का पूरा नाम Madhya Pradesh Public Service Commission है। हिंदी में इसे मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग कहा जाता है।

14. MPPSC के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल कितने वर्ष का होता है?

MPPSC के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 6 वर्ष या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, निर्धारित है।

15. MPPSC अध्यक्ष से संबंधित कौन-कौन से अनुच्छेद महत्वपूर्ण हैं?

MPPSC के लिए संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 महत्वपूर्ण हैं। इनमें आयोग की स्थापना, नियुक्ति, कार्यकाल, हटाने की प्रक्रिया, कार्य, खर्च और वार्षिक रिपोर्ट आदि से संबंधित प्रावधान हैं।

16. MPPSC का पहला अध्यक्ष कौन था?

MPPSC के पहले अध्यक्ष डी. वी. रेगे (D. V. Rege) थे। यह प्रश्न MPPSC तथा अन्य मध्य प्रदेश प्रतियोगी परीक्षाओं के सामान्य ज्ञान में पूछा गया है।

17. क्या प्रदीप कुमार जोशी MPPSC के अध्यक्ष रहे हैं?

हाँ। प्रदीप कुमार जोशी मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं। बाद में वे संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के अध्यक्ष भी बने।

18. MPPSC के अध्यक्ष का पद संवैधानिक है या वैधानिक?

MPPSC एक संवैधानिक निकाय है। राज्य लोक सेवा आयोगों का संवैधानिक आधार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 से 323 में दिया गया है।

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