यशवंत सागर इंदौर | Yashwant Sagar Indore

इंदौर का यशवंत सागर रामसर साइट में शामिल | इंदौर के यशवंत सागर को मिला रामसर साइट का दर्जा | मध्यप्रदेश को मिला चौथा रामसर साइट यशवंत सागर , इंदौर

13 अगस्त 2022 को भारत की नई 11 साइट को रामसर साइट में शामिल किया गया था जिसमें मध्यप्रदेश के इंदौर का यशवंत सागर को रामसर साइट ( आर्द्रभूमि / वेटलैंड ) में शामिल कर लिया गया है।

Note :- 13 अगस्त, 2022 को देश में नई घोषित 11 रामसर साइट्स –

  1. यशवंत सागर – इंदौर , मध्य प्रदेश
  2. ठाणे क्रीक – महाराष्ट्र
  3. शालबुग वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व – जम्मू कश्मीर
  4. हाइगम वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व – जम्मू कश्मीर
  5. हीराकुंड जलाशय – ओडिशा
  6. अंशुपा झील – ओडिशा
  7. तंपारा झील – ओडिशा
  8. चित्रागुड़ी पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु
  9. सुचिन्द्रम थेरूर वेटलैंड कॉम्प्लेक्स – तमिलनाडु
  10. कांजीरकुलम पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु
  11. वडुवुर पक्षी अभयारण्य – तमिलनाडु

Note :- 3 अगस्त 2022 को मध्य प्रदेश के सिरपुर तालाब को रामसर साइट में शामिल कर लिया गया है तथा 13 अगस्त 2022 को इंदौर के यशवंत सागर को भी रामसर साइट में शामिल कर लिया गया है इस प्रकार प्रदेश में अब कुल 4 रामसर साइट्स हो गई है

  1. भोज ताल (बड़ा तालाब) , भोपाल – 2002
  2. सांख्य सागर झील , शिवपुरी – 26 जुलाई 2022
  3. सिरपुर तालाब , इंदौर – 3 अगस्त 2022
  4. यशवंत सागर , इंदौर – 13 अगस्त 2022

यशवंत सागर की जानकारी

यशवंत सागर जलाशय इंदौर का पर्यटन स्थल है I

यशवंत सागर मध्य प्रदेश का रामसर साइट में शामिल चौथा स्थल है तथा इंदौर का दूसरा स्थल है इसके पहले इंदौर के सिरपुर तालाब को रामसर साइट में शामिल कर लिया गया था I

यशवंत सागर का निर्माण इंदौर के पश्चिमी क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए होलकर वंश के राजा तुकोजीराव तृतीय ने वर्ष 1900 में करवाया था I

यशवंत सागर का नाम तुकोजीराव तृतीय के बेटे यशवंतराव द्वितीय के नाम पर इसका नामकरण किया गया था I

यशवंत सागर जलाशय का निर्माण गंभीर नदी पर बांध बनाकर किया गया है जो लगभग 2000 एकड़ में फैला हुआ है I

यशवंत सागर झील को वर्ष 1992 में प्रमुख पक्षी क्षेत्र बनाया गया था तथा वर्ष 2017 से इसे रामसर साइट में शामिल करवाने का प्रयास जारी है I

यशवंत सागर में वर्ष 2013 में बांध बनवाया गया इसके पहले यहां सायफन हुआ करते थे I

यशवंत सागर झील सारस के पर्यावास के लिए जाना जाता है यहां पर सारस काफी संख्या में मिलते हैं इसके अलावा यहां पर अन्य प्रवासी पक्षी भी आते हैं तथा इस झील में मछली पालन भी होता है I

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