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नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) क्या है?
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (Comptroller and Auditor General of India – CAG) भारत का सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान है। यह केंद्र एवं राज्य सरकारों, सार्वजनिक उपक्रमों तथा सरकारी संस्थाओं के वित्तीय लेन-देन की जांच एवं लेखा परीक्षा करता है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 तक CAG से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।
CAG भारतीय लोकतंत्र में वित्तीय जवाबदेही एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली एक महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। इसे भारत की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था का प्रहरी (Guardian of Public Purse) भी कहा जाता है।
MPPSC, UPSC, SSC, रेलवे तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में CAG से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए यह विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है।
CAG एक नजर में
विषयविवरणपूरा नामनियंत्रक एवं महालेखा परीक्षकअंग्रेजी नामComptroller and Auditor General of Indiaसंवैधानिक आधारअनुच्छेद 148-151नियुक्तिराष्ट्रपति द्वाराकार्यकाल6 वर्ष या 65 वर्ष की आयुहटाने की प्रक्रियासर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समानमुख्यालयनई दिल्लीभूमिकासरकारी खातों की लेखा परीक्षा
CAG का ऐतिहासिक विकास
भारत में लेखा परीक्षा व्यवस्था की शुरुआत ब्रिटिश शासन काल में हुई थी। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद संविधान निर्माताओं ने वित्तीय अनुशासन और सरकारी व्यय की निगरानी के लिए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की स्वतंत्र संवैधानिक व्यवस्था स्थापित की।
26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही CAG का पद संवैधानिक संस्था के रूप में स्थापित हुआ।
CAG से संबंधित संवैधानिक अनुच्छेद
अनुच्छेद 148
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति, शपथ तथा सेवा शर्तों से संबंधित प्रावधान।
अनुच्छेद 149
संसद द्वारा निर्धारित कर्तव्य एवं शक्तियां।
अनुच्छेद 150
भारत संघ एवं राज्यों के खातों का प्रारूप राष्ट्रपति द्वारा निर्धारित किया जाता है।
अनुच्छेद 151
CAG की रिपोर्ट राष्ट्रपति अथवा राज्यपाल को प्रस्तुत की जाती है।
CAG की नियुक्ति
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
पद ग्रहण करने से पूर्व CAG राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त अधिकारी के समक्ष शपथ ग्रहण करता है।
CAG का कार्यकाल
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का कार्यकाल निम्न में से जो पहले हो तक रहता है—
- 6 वर्ष
- 65 वर्ष की आयु
CAG को पद से हटाने की प्रक्रिया
CAG को केवल उसी प्रक्रिया द्वारा हटाया जा सकता है जिस प्रक्रिया द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है।
हटाने के आधार:
- सिद्ध कदाचार (Proved Misbehaviour)
- अक्षमता (Incapacity)
यह प्रक्रिया संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा पूर्ण होती है।
CAG की स्वतंत्रता के संवैधानिक प्रावधान
CAG की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संविधान में अनेक सुरक्षा उपाय दिए गए हैं—
- राष्ट्रपति द्वारा नियुक्ति
- कठिन हटाने की प्रक्रिया
- वेतन एवं भत्ते भारत की संचित निधि से
- सेवा शर्तों में नियुक्ति के बाद प्रतिकूल परिवर्तन नहीं
- सेवानिवृत्ति के बाद किसी अन्य सरकारी पद के लिए अयोग्यता
CAG के प्रमुख कार्य
1. सरकारी खातों की लेखा परीक्षा
केंद्र और राज्य सरकारों के खातों का परीक्षण करता है।
2. व्यय की वैधता की जांच
यह सुनिश्चित करता है कि सरकारी धन का उपयोग संसद या विधानसभा द्वारा स्वीकृत उद्देश्य के लिए ही किया गया हो।
3. सार्वजनिक उपक्रमों की लेखा परीक्षा
सरकारी कंपनियों एवं निगमों की वित्तीय जांच करता है।
4. प्रदर्शन लेखा परीक्षा (Performance Audit)
सरकारी योजनाओं की प्रभावशीलता और परिणामों का मूल्यांकन करता है।
5. वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करना
सरकारी संस्थाओं को वित्तीय अनुशासन में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
CAG की शक्तियां
- सरकारी अभिलेखों की जांच
- लेखा परीक्षा रिपोर्ट तैयार करना
- वित्तीय अनियमितताओं की पहचान
- संसद एवं विधानमंडलों को रिपोर्ट प्रस्तुत करना
- सरकारी व्यय की वैधता का परीक्षण
CAG की रिपोर्ट किसे सौंपी जाती है?
केंद्र सरकार के मामलों में
CAG अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है।
राष्ट्रपति रिपोर्ट को संसद के समक्ष रखवाते हैं।
राज्य सरकार के मामलों में
रिपोर्ट संबंधित राज्यपाल को प्रस्तुत की जाती है।
राज्यपाल रिपोर्ट को राज्य विधानमंडल के समक्ष रखवाते हैं।
लोक लेखा समिति (PAC) और CAG
लोक लेखा समिति (Public Accounts Committee) संसद की एक महत्वपूर्ण समिति है।
CAG की रिपोर्टों की जांच लोक लेखा समिति द्वारा की जाती है।
इसी कारण CAG को लोक लेखा समिति का मित्र, दार्शनिक एवं मार्गदर्शक (Friend, Philosopher and Guide) कहा जाता है।
CAG और CGA में अंतर
आधारCAG , CGA पूर्ण नाम Comptroller and Auditor General , Controller General of Accountsप्रकृतिसंवैधानिक संस्थाकार्यपालिका के अंतर्गतनियुक्तिराष्ट्रपतिकेंद्र सरकारमुख्य कार्यलेखा परीक्षालेखा संधारणस्वतंत्रतापूर्ण संवैधानिक स्वतंत्रतावित्त मंत्रालय के अधीन
प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु महत्वपूर्ण तथ्य
- CAG का उल्लेख संविधान के अनुच्छेद 148 से 151 में है।
- नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
- कार्यकाल 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक होता है।
- हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है।
- लोक लेखा समिति CAG रिपोर्टों की जांच करती है।
- CAG को भारत की सार्वजनिक वित्त व्यवस्था का प्रहरी कहा जाता है।
MPPSC एवं UPSC हेतु महत्वपूर्ण MCQ
प्रश्न 1
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक का उल्लेख संविधान के किस अनुच्छेद में है?
(A) 124
(B) 148
(C) 280
(D) 324
उत्तर: (B)
प्रश्न 2
CAG की नियुक्ति कौन करता है?
(A) प्रधानमंत्री
(B) संसद
(C) राष्ट्रपति
(D) सर्वोच्च न्यायालय
उत्तर: (C)
प्रश्न 3
CAG का कार्यकाल कितना होता है?
(A) 5 वर्ष
(B) 6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
(C) 7 वर्ष
(D) 10 वर्ष
उत्तर: (B)
प्रश्न 4
CAG की रिपोर्टों की जांच कौन करता है?
(A) वित्त आयोग
(B) निर्वाचन आयोग
(C) लोक लेखा समिति
(D) नीति आयोग
उत्तर: (C)
प्रश्न 5
CAG को पद से हटाने की प्रक्रिया किसके समान है?
(A) प्रधानमंत्री
(B) राज्यपाल
(C) राष्ट्रपति
(D) सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश
उत्तर: (D)
FAQ
CAG क्या है?
यह भारत का सर्वोच्च लेखा परीक्षा संस्थान है जो सरकारी वित्तीय गतिविधियों की जांच करता है।
CAG की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के राष्ट्रपति।
CAG किस अनुच्छेद में वर्णित है?
अनुच्छेद 148 से 151 तक।
CAG का कार्यकाल कितना होता है?
6 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक।
CAG की रिपोर्ट किसे सौंपी जाती है?
केंद्र के मामलों में राष्ट्रपति को तथा राज्यों के मामलों में राज्यपाल को।
CAG को सार्वजनिक धन का प्रहरी क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह सरकारी धन के उपयोग की निगरानी करता है और वित्तीय जवाबदेही सुनिश्चित करता है।
निष्कर्ष
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) भारत की सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं में से एक है। यह सरकारी व्यय की निगरानी, वित्तीय पारदर्शिता तथा जवाबदेही सुनिश्चित करता है। MPPSC, UPSC, SSC, Railway एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से CAG एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए अभ्यर्थियों को इसके संवैधानिक प्रावधान, नियुक्ति, कार्यकाल, शक्तियां एवं कार्यों का गहन अध्ययन करना चाहिए।
Bhut behtareen likha he bhayya sari knowledge ak hi jgah mil gyi ese hi Or topics par post bnaye